Saturday, 13 June 2020

लॉकडाउन ने किया प्रवासियों, छोटे किसानों को प्रभावित

लॉकडाऊन में नमी के बाद पपीतों के ट्रक को खाली करते दो मज़दूर बच्चे. 11.06.2020

विश्वव्यापी काथलिक उदारता संगठन कारितास की भारतीय शाखा कारितास इन्डिया ने हाल ही में एक ऑनलाइन बैठक के दौरान, भारत के कलीसियाई नेताओं के समक्ष, कोविद-19 लॉकडाउन के दौरान, छोटे-धारक किसानों और प्रवासियों पर अपने अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी
नई दिल्ली, शुक्रवार, 12 जून 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): विश्वव्यापी काथलिक उदारता संगठन कारितास की भारतीय शाखा कारितास इन्डिया ने हाल ही में एक ऑनलाइन बैठक के दौरान, भारत के कलीसियाई नेताओं के समक्ष, कोविद-19 लॉकडाउन के दौरान, छोटे-धारक किसानों और प्रवासियों पर अपने अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
कारितास इन्डिया द्वारा भारत के 18 राज्यों पर किये अध्ययन के अनुसार, "80 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों ने कहा कि कोविद -19 के प्रकोप के बाद उनकी आय कम हो गई है।"
6 जून 2020 को एक ऑनलाइन बैठक में, कारितास इंडिया ने कोविद-19 लॉकडाउन के दौरान आंतरिक प्रवासियों तथा छोटे और सीमांत किसानों पर अपने दो अध्ययनों के परिणामों को साझा किया।
बैठक में भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष एवं मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेशियस, प्रान्तीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के अध्यक्ष तथा सम्पूर्ण भारत से निर्देशकों के मंच ने भाग लिया।
इस तथ्य को रेखांकित किया गया कि महामारी के दौरान लॉकडाउन ने एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा की है, जिसने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है, तथा प्रवासियों और छोटे कृषक समुदायों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

आप्रवासियों की जीविका

अध्ययन से पता चला है कि सर्वेक्षण में शामिल 95.2 प्रतिशत प्रवासियों ने अपनी आजीविका के साधन खो दिए हैं तथा लगभग 10.6 प्रतिशत ने परिवार के किसी न किसी सदस्य को खो दिया है।
जब भारत सरकार ने 24 मार्च को कोविद -19 के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी तालाबंदी का आदेश दिया, तो आप्रवासी मज़दूरों सहित लाखों दैनिक वेतन भोगी, अचानक बिना किसी आजीविका, भोजन और आश्रय के रह गये थे।
अधिकांश प्रवासी मज़दूर निर्माण, कारखानों, घरेलू काम, कपड़ा, ईंट भट्टों, परिवहन और कृषि क्षेत्रों में मज़दूरी करते हैं।
कारितास इन्डिया का अध्ययन बुनियादी जरूरतों, आजीविका, अधिकारों तथा प्रवासियों के विरुद्ध  भेदभाव और शोषण पर केंद्रित है। अध्ययन भारत के 10 सर्वाधिक प्रभावित राज्यों - उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम में आयोजित किया गया था।
शहरों से गाँवों की ओर जाते समय कम से कम सैकड़ों मज़दूरों की मौत पर भी कारितास इन्डिया ने शोक किया।

किसानों की स्थिति

एक अन्य सर्वेक्षण में, कारितास इंडिया ने लघुधारक कृषि क्षेत्र पर कोविद -19 के प्रभाव का अध्ययन किया। 80.4 प्रतिशत किसानों की आमदनी में भारी कमी आई है, इसके अतिरिक्त, उन्हें आगामी फसल के लिये अनिश्चित मौसम का सामना करना पड़ रहा है।
18 राज्यों में इस शोध के लिए लगभग 424 किसानों से संपर्क किया गया था। कृषि उत्पादन, वितरण, भोजन और पोषण की उपलब्धता, आय सृजन और खर्चों पर महामारी  का क्या प्रभाव पड़ा है यह अध्ययन का विषय था। अध्ययन के अनुसार, 54.4 प्रतिशत किसानों को सरकारी या ग़ैरसरकारी संस्थाओं से मदद मिली है जबकि अन्य छोटे-छोटे किसान को किसी प्रकार की मदद नहीं मिल पाई।
यह भी पता चला कि 49 प्रतिशत छोटे किसान खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं, और 16.5 प्रतिशत ने भोजन की कमी के कारण पिछले 10 दिनों से भोजन करना छोड़ दिया है।

No comments:

Post a Comment

Final report of Synod's canon law commission published

  Final report of Synod's canon law commission published The canon law commission's final report proposes amendments to the Code of ...